नीम के पत्तों से कीटनाशक दवा -
नीम की पेड़ की 15 किलोग्राम पत्तिया तथा 5 किलोग्राम जेट्रोफा पेड़ की पत्तियाँ को लगभग 200 लीटर पानी में डाल कर इसे 15 दिन तक सड़ने के लिए छोड़ देतें है | लगभग 15 दिनों के पश्चात् जब पत्तियाँ पुरी तरह सड़ जाती है इस सावधानी से छान कर रख देतें है शाम के समय खड़ी फसल पर इसका छिडकाव किया जाता है | इस दवा का स्प्रे कीटनाशक एवं फफूंद नाशक दोनों की भूमिका का निर्वाह करता है जेट्रोफ की पत्तियाँ नही मिलने पर केवल नीम की पातियों से भी यह दवा बनाई जा सकती है |
निबोली (नीम के बीज ) काढ़ा :-
इस ही वर्ष के नीम के बीज से तैयार 2 किलोग्राम निबोली पावडर को 5 लीटर देशी गाय की गोमूत्र में तथा 12 लीटर पानी में मिलकर एक बड़े पुराने मटके में 5 दिन तक गलाते है | पांच दिनों के तत्पश्चात इस घोल को को आधा बचने तक उबाल कर काढ़ा बनाते है| इस काढ़े को सावधानी से छान कर 100 मिली लीटर, 16 लीटर पानी में मिलाकर फसलो पर स्प्रे करने पर लगभग हर किट के अन्डो तथा निप्फ़ नियंत्रण होता है | यह दवा फंगस के विस्तार पर भी रोक लगता है |
नीम की पेड़ की 15 किलोग्राम पत्तिया तथा 5 किलोग्राम जेट्रोफा पेड़ की पत्तियाँ को लगभग 200 लीटर पानी में डाल कर इसे 15 दिन तक सड़ने के लिए छोड़ देतें है | लगभग 15 दिनों के पश्चात् जब पत्तियाँ पुरी तरह सड़ जाती है इस सावधानी से छान कर रख देतें है शाम के समय खड़ी फसल पर इसका छिडकाव किया जाता है | इस दवा का स्प्रे कीटनाशक एवं फफूंद नाशक दोनों की भूमिका का निर्वाह करता है जेट्रोफ की पत्तियाँ नही मिलने पर केवल नीम की पातियों से भी यह दवा बनाई जा सकती है |
निबोली (नीम के बीज ) काढ़ा :-
इस ही वर्ष के नीम के बीज से तैयार 2 किलोग्राम निबोली पावडर को 5 लीटर देशी गाय की गोमूत्र में तथा 12 लीटर पानी में मिलकर एक बड़े पुराने मटके में 5 दिन तक गलाते है | पांच दिनों के तत्पश्चात इस घोल को को आधा बचने तक उबाल कर काढ़ा बनाते है| इस काढ़े को सावधानी से छान कर 100 मिली लीटर, 16 लीटर पानी में मिलाकर फसलो पर स्प्रे करने पर लगभग हर किट के अन्डो तथा निप्फ़ नियंत्रण होता है | यह दवा फंगस के विस्तार पर भी रोक लगता है |

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