Sunday, 23 August 2015

जीरो बजट (लागत विहीन) या प्राकृतिक खेती क्या है….?


जीरो बजट (लागत विहीन) या प्राकृतिक खेती क्या है….?
जीरो बजट एक पूर्ण प्राकृतिक कृषि है इस खेती में पेड़ पौधो के अंश और जीवांश एवं देसी गाय के गोबर एवं गौमूत्र पर आधारित है । एक देसी गाय के गोबर एवं गौमूत्र से एक किसान तीन तीस एकड़ जमीन पर जीरो बजट खेती कर सकता है । गाय से प्राप्त सप्ताह भर के गोबर एवं गौमूत्र से निर्मित घोल का खेत में छिड़काव
खाद का काम करता है और भूमि की उर्वरकता का ह्रास भी नहीं होता है। देसी प्रजाति के गौवंश के गोबर एवं
 मूत्र से जीवामृत, घनजीवामृत तथा जामन बीजामृत बनाया जाता है । 
इनका खेत में उपयोग करने से मिट्टी में पोषक तत्वों की वृद्धि के साथ-साथ जैविक गतिविधियों का विस्तार होता है । जीवामृत का महीने में एक अथवा दो बार खेत में छिड़काव किया जा सकता है । जबकि बीजामृत
 का इस्तेमाल बीजों को उपचारित करने में किया जाता है । इस विधि से खेती करने वाले किसान को बाजार 
से किसी प्रकार की खाद और कीटनाशक रसायन खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती है।
फसलों की सिंचाई के लिये पानी एवं बिजली भी मौजूदा खेती-बाड़ी की तुलना में दस प्रतिशत ही खर्च होती 
है । इसके इस्तेमाल से एक ओर जहां गुणवत्तापूर्ण उपज होती है, वहीं दूसरी ओर उत्पादन लागत लगभग 
शून्य रहती है ।

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